जामताड़ा के पंचायत भवनों को बेहतर बनाकर सबमें लाइब्रेरी खोले गये हैं। Image Source : Photo tweeted by official handle of DC Jamtara

अनोखी पहल : बेकार पड़े 118 पंचायत भवनों में कम्युनिटी लाइब्रेरी, अफसर लगा रहे युवाओं की क्लास

Patna : जामताड़ा जिले के नाला गांव में पुनर्निर्मित पंचायत भवन के कम्युनिटी लाइब्रेरी में सब-इंस्पेक्टर आकाश सिंह रोज तीन घंटे नौवीं-दसवीं क्लास के स्टूडेन्ट‍्स को गणित पढ़ाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनेवालों को भारतीय राजनीति पढ़ाते हैं। नाला में यह पुस्तकालय पिछले साल 13 नवंबर को जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई एक नई पहल का हिस्सा है। साइबर अपराध के केंद्र के रूप में जाने जानेवाले जिले में अब 118 ऐसे पुस्तकालय हैं, जो सभी पंचायत भवनों में चल रही हैं। उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज ने कहा- यह एक लंबी प्रक्रिया है, लेकिन ऐसी उम्मीद है कि पुस्तकालय जिले के युवाओं को साइबर अपराध में तेजी से पैसा बनाने के लालच से दूर रहने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि उन्हें यह विचार तब आया जब एक ग्रामीण ने उनसे पूछा कि क्या पढ़ने के लिये जगह की व्यवस्था की जा सकती है। धीरे-धीरे, हमने जीर्ण-शीर्ण इमारतों को पुस्तकालयों में बदलना शुरू कर दिया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर में वृद्धि करना है, विशेष रूप से महिला साक्षरता जो 49.66% है। जिला प्रशासन ने 15 वें वित्त आयोग के ‘अनटाइड फंड’ का इस्तेमाल इमारतों की बदहाली को दूर करने के लिये किया गया। इनको दुरुस्त करने में 60,000 रुपये से 2.2 लाख रुपये प्रति पुस्तकालय का खर्च आया। बुकशेल्फ़, टेबल और कुर्सियों को ब्लॉक और पंचायत स्तर पर या सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी) के माध्यम से अधिकारियों द्वारा वित्त पोषित कराया गया।
जिला प्रशासन ने किताबें भी उपलब्ध करा दी हैं। जबकि स्थानीय समुदाय से एक लाइब्रेरियन है। पुलिस कर्मियों के अलावा जूनियर इंजीनियर, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सेवक समेत सभी अधिकारी, इन पुस्तकालयों में से आधे में हर हफ्ते कम से कम एक कक्षा लेते हैं। सामुदायिक पुस्तकालय शुरू करना सबसे अच्छी पहलों में से एक है, क्योंकि जिले को साइबर अपराध से बाहर लाने का एकमात्र तरीका युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करना और उन्हें सही दिशा में लगाना है। नाला पुलिस स्टेशन में तैनात एसआई सिंह ने कहा- लगभग 50 छात्र, कई पालियों में, रोजाना पढ़ने आते हैं।
नाला के लाइब्रेरियन अक्षय रे स्नातक हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा- नाला पुलिस स्टेशन में कार्यरत एक रेडियो ऑपरेटर भी यहां पढ़ने के लिये आता है। यहां का माहौल पढ़ाई के लिए अनुकूल है। प्रत्येक पुस्तकालय में एक पंचायत स्तर की पुस्तकालय रखरखाव समिति होती है जिसमें स्वयंसेवी शामिल होते हैं, और जनता से योगदान एकत्र करने के लिए इसका अपना बैंक खाता होता है। अधिक पुस्तकें खरीदने, बिजली के बिलों का भुगतान करने और पुस्तकालय के उन्नयन का दायित्व स्थानीय समुदाय पर है। सभी पुस्तकालयों को जियो-टैग किया गया है और उनके निर्देशांक और विवरण जिले की वेबसाइट पर अपलोड कर दिये गये हैं।
डीसी ने कहा- हाल ही में, 31 पुस्तकालयों के बीच एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसने युवाओं के बीच आकर्षण पैदा किया है। हमें सभी पुस्तकालयों को चालू रखने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होगी। नाला से करीब 50 किलोमीटर दूर लखनपुर गांव में लाइब्रेरियन राजू मरांडी ने कहा – जिला प्रशासन को और मदद की जरूरत है। पंचायत मुखिया सुनील बसकी ने कहा- हमें और अधिक अंतर-विभागीय समन्वय की आवश्यकता है ताकि मैं पुस्तकालय में कुछ अच्छे शिक्षकों को शामिल करने के लिये पंचायत निधि का उपयोग कर सकूं। यहां के लोगों को इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है कि इस जगह का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे किया जाये। मैं कुछ छात्रों को पढ़ाता हूं, लेकिन जिला प्रशासन को कुछ अच्छे शिक्षकों को नियुक्त करने की जरूरत है।

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