वट सावित्री की पूजा करने के बाद सेल्फी लेती महिलायें। तस्वीर 2017 की है। Photo- PTI

वट सावित्री : कोरोना के बावजूद महिलाओं ने व्रत में दिखाया उत्साह, वटवृक्ष पूजन से माहौल दमका

Patna : बिहार में महिलाओं ने आज गुरुवार को पूरी श्रदधा के साथ वट सावित्री की पूजा की। हालांकि कोरोना की वजह से भीड़ कम रही लेकिन उत्साह कम नहीं दिखा। आज शनि जयंती और अमावस्या की पूजा भी होगी। आज सूर्यग्रहण भी लग रहा है, लेकिन इसका प्रभाव बिहार में नहीं रहेगा। इसलिये, व्रती और श्रद्धालु नि:संकोच पूजा कर रहे हैं। ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि का प्रारंभ 9 जून को दोपहर 1.59 बजे हुआ, जो 10 जून को शाम 4.22 बजे तक रहेगा। वट सावित्री पूजा के लिये शुभ समय : सुबह 7.43 से 10.06 बजे तक कर्क लग्न रहेगा, जो उत्तम लग्न है। ऐसे पूजा दिनभर की जा सकती है, लेकिन योग सामान्य रहेगा। यह पूजा पति की लंबी आयु के लिये की जाती है। पति के यश और मान में वृद्धि होती है।

वट सावित्री की पूजा करतीं महिलायें।

जेठ कृष्णपक्ष अमावास्या को दो पर्व मनाये जा रहे हैं। महिलाएं अखंड सुहाग की कामना के लिये वट सावित्री व्रत कर रहीं हैं। आज सूर्यग्रहण भी है। भारतीय पंचाग के अनुसार ग्रहण की शुरुआत दोपहर 1.42 बजे होगी और इसका समापन शाम 6.41 पर होगा। इसकी कुल अवधि पांच घंटे होगी, लेकिन सूर्यग्रहण के नहीं दिखने के कारण पंडित इसका प्रभाव नहीं मान रहे हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण का प्रभाव तभी माना जाता है, जब वह दिखाई दे। इसलिए यहां सूतक भी नहीं लगेगा। भक्त वट सावित्री और शनि पूजा दिन भर कर सकेंगे।
अमावस्या पूजा का विशेष योग : गुरुवार को रोहिणी नक्षत्र और धृति योग में पड़ रहा है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तम योग है। इस योग से पूजा करने वालों को उत्तम फल की प्राप्ति होगी। शुभ समय : सुबह 5.30 से 7.48 बजे तक और शाम में 4.50 से 7 बजे तक। पितरों की पूजा और प्रसन्नता के लिए आज के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। विशेष योग : इस वर्ष शनि अपने घर में हैं, इसलिए जल्द प्रसन्न होंगे। धनु, मकर और कुंभ राशिवालों पर शनि की साढ़े साती चल रही है। मिथुन व तुला ढैय्या चल रहा है। इसलिए, ये आज शनिदेव की पूजा करते हैं तो विशेष लाभ प्राप्त होगा। शुभ समय : सुबह सूर्योदय काल से लेकर शाम 4.22 बजे तक पूजा करने का शुभ मुर्हूत है। विशेष योग : एक साथ चार ग्रह सूर्य, चंद्रमा, बुध व राहु वृषभ राशि में रहेंगे, जिससे चतुर्गही योग बन रहा है, जिसे शुभ माना जाता है।
बहरहाल अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री व्रत की कथा सुनने मात्र से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने से घर में सुख-शांति समृद्धि के साथ साथ धनलक्ष्मी का वास होता है। वट वृक्ष में तीनों देवों का वास माना जाता है। मान्यता है कि वट वृक्ष में शरीर के कई रोगों का नाश करने की क्षमता होती है। इस दिन जो भी विवाहित महिला व्रत रखकर विधिवत पूजा आराधना करती है, उनके पति की रक्षा अनेक संकटों से होती है।
अक्षय अहिबात (सुहाग) के लिये मैथिलानियों के समर्पण का प्रकटीकरण होगा। पति की सलामती के लिये महिलाएं अपने सुहाग के प्रतीक वट के वृक्ष का पूजन कर रहीं हैं। उसे गले लगाने के साथ-साथ उसे पंखा झेल रहीं हैं। मालूम हो कि विवाहिताओं का यह प्रसिद्ध मिथिला का लोकपर्व है। त्यौहार के दिन जहां नवविवाहिताएं विशेष पूजन करेंगी वहीं अन्य विवाहिताएं भी उपवास रख कर व्रत पूजन करेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *