यह है पटना गया रोड। मानो खेत में चल रही हो गाड़ी। Image Source : tweeted by @iamthesengar

घटिया सड़क और सफर की नजीर पटना-गया-डोभी सड़क पर अभी डेढ़ साल और बहाना होगा आंसू

New Delhi : कई सालों से बिहार में खराब कार्यप्रणाली की पहचान बन चुके पटना-गया-डोभी सड़क का निर्माण अब दिसंबर 2022 तक पूरा हो सकेगा। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने केंद्रीय राजमार्ग परिवहन मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी दी है। सुशील मोदी के मुताबिक, सड़क निर्माण से जुड़ी परेशानी को दूर कर लिया गया है और इसके लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। 5 साल से अटके पटना-गया-डोभी सड़क राजमार्ग का निर्माण अब जल्द रफ्तार पकड़ने वाला है। केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि दिसम्बर 2022 तक जापान सरकार के सहयोग से 1610.47 करोड़ की लागत से सड़क निर्माण का काम पूरा करने का लक्ष्य है। राज्यसभा में सांसद सुशील कुमार मोदी के सवाल का जवाब देते हुये केन्द्रीय मंत्री ने यह बात कही है। उन्होंने कहा है कि तीनों पैकेजों की सड़कों के निर्माण के लिये भूमि उपलब्ध हो गई है।

 

पटना-गया-डोभी सड़क 127 किमी लंबी है। इस सड़क का निर्माण कार्य नवम्बर-दिसम्बर 2020 से शुरू किया गया था। इस सड़क पर मई 2021 तक 91.15 करोड़ खर्च किये जा चुके हैं, लेकिन अब तक तीनों पैकेजों की भौतिक प्रगति औसत 9 प्रतिशत ही है। केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने पटना के महात्मा गांधी सेतु के समानांतर बन रहे पुल को लेकर भी राज्यसभा में जानकारी दी है। चार लेन वाले पुल तथा 8 लेन के पहुंच पथ को स्वीकृति मिल गई है। इसकी लागत 2962.42 करोड़ रुपए है। सितम्बर 2024 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
डोभी-गया-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग 83 का कार्य पूरा होने के बाद इस पर सरपट गाड़ियां दौड़ने लगेगी। अभी गया से पटना सड़क मार्ग से जाने के लिये 109 किमी की दूरी तय करने में चार से पांच घंटे का समय लगता है। सड़क निर्माण कार्य में वर्ष 2020 से तेजी आयी। लेकिन कोरोना और मानसून की मार ने सड़क निर्माण को प्रभावित किया है। गया, जहानाबाद और पटना इन तीनों जिले में करीब 10 से 15 प्रतिशत का काम पूर्ण हो गया है। इन जिले में प्रथम चरण का कार्य पूरा हो गया है। दूसरे चरण का काम शुरु हो गया है।
डोभी से गया-पटना तक सड़क निर्माण पर भूतल एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा 1619 करोड़ रुपये खर्च करेगा। जब इस योजना की शुरुआत की गई थी, उस वक्त इस सड़क निर्माण पर 1232 करोड़ का प्राक्कलन बना था। उस वक्त हैदराबाद की एक बड़ी कपंनी कार्य करा रही थी।

कुछ माह गुजरने के बाद कंपनी ने काम करने से इंकार कर दिया था। उसके बाद कई महीने तक काम बंद था। लेकिन केंद्र सरकार, एनएचआई और भूतल एवं परिवहन मंत्रालय लगातार प्रयास करती रही। कई साल गुजर गये। इस काम करने के लिये कोई कंपनी तैयारी नहीं हुई। हाई कोर्ट ने भी इस सड़क निर्माण में संज्ञान लिया। तब जाकर तीन जिले में तीन फेज में बांटकर निविदा निकली गई। तब उस निविदा में तीन अलग-अलग कंपनी का चयन किया गया।

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