एनडीए में ये क्या हुआ! चिराग ने अब सीधे PM मोदी को ही लिख दी चिट्ठी

पटना
बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए को लेकर लगातार इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि यहां सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। लेकिन सोमवार को तो कुछ ऐसा हुआ, जिसने अचानक बिहार की राजनीति में तूफान ला दिया है। असल में चिराग पासवान ने बिहार के राजनीतिक हालात को लेकर सीधे पीएम मोदी को ही चिट्ठी लिख दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस चिट्ठी में सीएम नीतीश कुमार के बारे में उनकी पार्टी यानी लोजपा की राय से पीएम मोदी को अवगत कराया गया है। अब पिछले कुछ महीनों से चिराग सीएम नीतीश को लेकर जैसी बयानबाजी कर रहे हैं उसे देखते हुए हर बिहारी ये अंदाजा सहज ही लगा सकता है कि उनकी पार्टी की क्या राय होगी।

चिराग की पीएम मोदी की को लिखी गई चिट्ठी की खबर कई मामलों में चौंकाऊ है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी दो दिन पहले ही जेपी नड्डा कह चुके हैं कि बिहार में नीतीश के नेतृत्व में चुनाव होगा और गठबंधन में सबकुछ ठीक है। चिराग भी रविवार तक नीतीश को लेकर थोड़ा सहज अंदाज में ही नजर आ रहे थे लेकिन चिट्ठी ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि ये सहजता तूफान के आने से पहले की शांति भी हो सकती है।

अहम सवाल यह है कि जब जेपी नड्डा बिहार दौरे पर थे तो चिराग को ये चिट्ठी पीएम को क्यों लिखनी पड़ी। इससे पहले यह भी खबर आई थी कि चिराग पासवान ने बिहार में गठबंधन के मुद्दों को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से संपर्क किया है। अब इन सबमें रोचक पहलू यह है कि चिराग को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से जो बातें करनी चाहिए उन्हें वो पीएम और गृहमंत्री से क्यों कर रहे हैं? असल में इस सवाल में ही इसका जवाब छिपा है और बिहार की तीक्ष्ण राजनीतिक मेधा इस सवाल का उत्तर जानती भी है।

आइए जरा थोड़ा पीछे चलकर ये बात भी जान लीजिए

असल में ये मामला फौरी तौर पर समझने से पहले हमें पिछले दिनों हुई लोजपा की संसदीय दल की बैठक तक वापस लौटना होगा। यह बैठक 7 सितंबर को दिल्ली में हुई थी। मीडिया रिपोर्टस में दावा किया गया कि संसदीय दल की बैठक में लोजपा ने बिहार विधानसभा चुनावों में जदयू प्रत्याशियों के खिलाफ कैंडिडेट देने का प्रस्ताव दिया है। यह भी कहा गया कि सैद्धांतिक तौर पर चिराग पासवान भी इस प्रस्ताव से सहमत बताए जा रहे हैं।

भाजपा के खिलाफ नहीं पर जदयू के खिलाफ देंगे उम्मीदवार?

इस बैठक में कई तरह के प्रस्ताव सामने आए थे। ऐसे ही एक प्रस्ताव के मुताबिक लोजपा का कहना था कि भाजपा जिन सीटों पर लड़ने वाली है उन्हें छोड़ बाकी सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएं। ऐसे में चिराग पासवान की पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी इस ओर भी इशारा कर रही है कि लोजपा संसदीय दल की बैठक से निकली राय को लेकर युवा नेता काफी गंभीर हैं।

रामविलास पासवान ने भी बेटे को दिया फ्री हैंड?

भारतीय राजनीति के सबसे बड़े मौसम विज्ञानी समझे जाने वाले रामविलास पासवान ने भी लगता है अपने बेटे चिराग पासवान को इस बार फ्री हैंड दिया है। पिछले दिनों एक के बाद एक तीन ट्वीट कर रामविलास ने खुलकर इसका ऐलान भी किया था।

रामविलास पासवान ने लिखा था कि, ‘मेरी ख़राब तबियत का एहसास जब चिराग को हुआ तो उसके कहने पर मैं अस्पताल गया और अपना इलाज करवाने लगा। मुझे ख़ुशी है कि इस समय मेरा बेटा चिराग मेरे साथ है और मेरी हर सम्भव सेवा कर रहा है। मेरा ख़याल रखने के साथ साथ पार्टी के प्रति भी अपनी ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभा रहा है। मुझे विश्वास है कि अपनी युवा सोच से चिराग पार्टी व बिहार को नयी ऊँचाईयों तक ले जाएगा। चिराग के हर फ़ैसले के साथ मैं मज़बूती से खड़ा हूं। मुझे आशा है कि मैं पूर्ण स्वस्थ होकर जल्द ही अपनों के बीच आऊँगा।’

बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश पर आक्रामक होने के पीछे चिराग की एक खास रणनीति है। ये रणनीति गठबंधन में से पार्टी के लिए अधिकतम सीटें निकालने की है। ऐसे में इन ट्वीट्स के बाद ये भी चर्चाएं शुरू हो गईं हैं कि कहीं चिराग को संदेश देने के बहाने रामविवास नीतीश और नड्डा को तो मैसेज नहीं दे रहे।

सीट शेयरिंग का मुद्दा महागठबंधन पर भी भारी

हालांकि सीट शेयरिंग का मुद्दा केवल एनडीए के लिए ही नहीं बल्कि महागठबंधन के लिए भी बड़ी चुनौती है। उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, मुकेश साहनी की पार्टी और वामपंथी पार्टियों को महागठबंधन में क्या मिलेगा, ये देखना भी काफी रोचक होगा क्योंकि विरोध के स्वर वहां भी उठते दिख रहे हैं।

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