Newly under constructed building. Representative Image. Image source- odishaTv

हमारी क्या बिसात : बिल्डर ने जज दम्पत्ति को ठग लिया, पैसे लिये, नहीं दिया फ्लैट, जेल जाने को तैयार

Patna : बिहार के नामचीन बिल्डर ने जज दम्पत्ति को भी ठगने से गुरेज नहीं किया। हद तो यह देखिये कि वह जेल तक जाने को तैयार है। लेकिन वायदे के मुताबिक फ्लैट देने को तैयार नहीं है। इस मामले में अदालत से भी कई बार फटकार और चेतावनी मिल चुकी है। अंतिम चेतावनी से पहले जेल की हवा भी खा चुका है फिर भी उसने जो फ्लैट जज दम्पत्ति को देना था वो किसी और दे दिया। पैसे हड़प लिये। मोतिहारी में पदस्थापित इस जज दंपत्ति से एक बिल्डर ने पटना में फ्लैट देने के नाम पर 29.50 लाख रुपये की ठगी कर ली है। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट निकलने के बाद रविवार को शास्त्रीनगर थाने की पुलिस ने बिल्डर अरविंद ठाकुर को रांची के बरियातू से गिरफ्तार भी कर लिया। पुलिस बिल्डर को लेकर पटना पहुंच गई है। मगर बिल्डर के माथे पर शिकन तक नहीं है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और वो भी मुंह बंद किये तमाशा देख रहा है।
इस मामले में जज दंपत्ति का आरोप है कि बिल्डर ने न तो फ्लैट दिया और न ही पैसे लौटाये। अदालत ने अप्रैल में उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। वैसे मामला 2014 का है। जज दंपत्ति तब सासाराम में पोस्टेड थे। अर्जुना होम्स के मालिक अरविंद व उसकी पत्नी शशिकला जज दंपत्ति के आवास पर किसी परिचित के जरिये पहुंचे और पटेल नगर गांधी मूर्ति के पास रामेश्वरम अपार्टमेंट में फ्लैट बुक करा लेने की सिफारिश की। स्कीम के बारे में भी बताया। जज ने उन्हें तत्काल एक लाख रुपये दिये। जनवरी 2014 में एग्रीमेंट हुआ और एलआईसी से लोन लेकर जज दंपती ने कई किस्तों में बिल्डर को 28.50 लाख रुपये दिये।
बिल्डर को 2016 में फ्लैट हैंडओवर करना था, लेकिन नहीं किया गया। मामला टलता रहा। पुलिस ने बताया कि अरविंद कई लोगों से ठगी कर चुका है। कुछ और लोगों को ठगने की फिराक में था। जांच में यह बात आई है कि निगम से पास नक्शे को भी नहीं माना जा रहा है। पुलिस और पीड़ितों का भी बयान लेगी। इधर थक हारकर जज दंपत्ति ने बिल्डर के खिलाफ 2019 में शास्त्रीनगर थाने में केस किया। वह गिरफ्तार भी हुआ था। तब कोर्ट ने यह कहते हुये जमानत दे दी थी कि मार्च 2020 तक बिल्डर या तो कोर्ट में पैसा जमा करे या फ्लैट दे। बिल्डर ने कोर्ट की अवमानना करते हुये न तो ड्राफ्ट जमा किया और न ही फ्लैट दिया। जज दंपत्ति का कहना है कि बिल्डर ने जिस फ्लैट के नाम पर पैसे लिये अब उसकी रजिस्ट्री दूसरे के नाम पर कर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *